नई दिल्ली, 3 अप्रैल || गुरुवार को हुए एक अध्ययन के अनुसार, हार्ट फेलियर से पीड़ित लोगों में ध्यान और समस्या समाधान जैसी संज्ञानात्मक क्षमताओं में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने समय के साथ लगभग 30,000 वयस्कों की संज्ञानात्मक क्षमताओं की जांच की, और हार्ट फेलियर से पीड़ित और इससे पीड़ित न होने वाले लोगों की तुलना की।
शोधकर्ताओं ने पाया कि हार्ट फेलियर निदान के समय संज्ञान में उल्लेखनीय कमी से जुड़ा है।
हार्ट फेलियर के निदान के बाद के वर्षों में वैश्विक संज्ञान और कार्यकारी कार्यप्रणाली में भी तेजी से गिरावट आई।
टीम ने पाया कि हार्ट फेलियर के निदान के सात साल के भीतर मानसिक रूप से इस स्थिति से पीड़ित लोगों की उम्र 10 साल के बराबर हो जाती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन मेडिकल स्कूल में इंटरनल मेडिसिन-कार्डियोलॉजी की प्रथम लेखिका और क्लीनिकल असिस्टेंट प्रोफेसर सुप्रिया शोर ने कहा, "हार्ट फेलियर एक ऐसी बीमारी है जो कभी खत्म नहीं होती और इसका इलाज मरीज की विशिष्ट निर्देशों का पालन करने, अपने लक्षणों की निगरानी करने और कई अलग-अलग दवाओं के साथ बने रहने की क्षमता पर निर्भर करता है।" उन्होंने कहा, "मरीजों में संज्ञानात्मक गिरावट को देखना, तथा हृदयाघात के निदान के बाद समय के साथ इसकी स्थिति और खराब होना, प्रदाताओं के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए कि वे मरीज की संज्ञानात्मक क्षमता का शीघ्र आकलन करें तथा उसे देखभाल योजना में शामिल करें।"